Skip to main content

Suheldev amish pdf free download english

Reducing single use plastic pollution Role of youth essay in Hindi

 



Reducing single use plastic pollution Role of youth essay in Hindi


Reducing single-use plastic pollution Role of youth essay in hindi



"प्लास्टिक मदद का हाथ देता है लेकिन
वे हमारी भूमि को प्रदूषित कर रहे हैं"

सिंगल-यूज प्लास्टिक या डिस्पोजेबल प्लास्टिक, केवल एक बार उपयोग किए जाते हैं, उन्हें फेंकने से पहले पुनर्नवीनीकरण किया जाता है। दुनिया भर के हर देश में प्लास्टिक मनुष्य की रोजमर्रा की जिंदगी का एक प्रासंगिक हिस्सा है, प्लास्टिक की थैलियां पर्यावरण प्रदूषण का एक प्रमुख कारण हैं,

एक पदार्थ के रूप में प्लास्टिक गैर-बायोडिग्रेडेबल है और इस प्रकार प्लास्टिक की थैलियां पर्यावरण में सैकड़ों वर्षों तक रहती हैं जो इसे अत्यधिक प्रदूषित करती हैं। हमारे ग्रह को पूरी तरह से बर्बाद करने से पहले प्लास्टिक की थैलियों पर प्रतिबंध लगाना बहुत जरूरी हो गया है।

प्लास्टिक की थैलियों के उत्पादन से जहरीले रसायन निकलते हैं ये हैं गंभीर बीमारी का मुख्य कारण, प्रदूषित वातावरण va5ious रोग का एक प्रमुख कारण है जो मानव में आसानी से फैल रहा है पशु और समुद्री जीव अनजाने में अपने भोजन के साथ प्लास्टिक के कणों का सेवन कुछ समय बाद करते हैं। प्लास्टिक बैग बोलता है-

"आज तुमने मुझे फेंक दिया है
कल मैं तुम्हें नष्ट कर दूंगा"

आज हानिकारक प्रभावों के कारण देश ने एक भारत-प्रदूषण मुक्त भारत के रूप में नए नियमों के लिए खुद को तैयार किया। लगभग हर राज्य ने प्लास्टिक के उपयोग पर अंकुश लगाने की कोशिश की और प्लास्टिक के उपयोग के विकल्प की तलाश जारी है।

भारत सरकार ने 2022 तक भारत को सिंगल-यूज प्लास्टिक से मुक्त करने के लिए देश भर में सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए एक बहु-मंत्रालयी योजना बनाई है, प्लास्टिक बैग, कप, प्लेट, पानी की बोतलें, स्ट्रॉ आदि पर देशव्यापी प्रतिबंध।

उपरोक्त को देखते हुए, हमारे राष्ट्र, पौधों और सभी जीवित प्राणियों के प्रति यह हमारी जिम्मेदारी है कि वे सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग बंद करें ताकि वे स्वस्थ और समृद्ध रह सकें।


"तुम मेरा इस्तेमाल करो, मुझे फाड़ दो, मुझे कुचल दो,
मुझे फेंक दो और मेरे साथ खेलो...
लेकिन कृपया याद रखें
मुझे रीसायकल करने के लिए ..."



Reducing single-use plastic pollution Role of youth essay in Hindi


सिंगल यूज प्लास्टिक पर निबंध 

"सिंगल यूज प्लास्टिक ना होता पुनः उपयोग हानिकारक सभी के लिए लगाता कितने रोग, निर्दोषों की मौत का कारण..फिर भी ना समझें लोग मुश्किल है इसका निस्तारण.. बंद करो प्रयोग।"


 परिचय- 

हमारे देश भारत में हर साल लाखों टन सिंगल यूज प्लास्टिक का उत्पादन किया जाता है, जिनमें से अधिकांश प्लास्टिक का पुनर्नवीनीकरण नहीं किया जा सकता है!
 इसको एक बार प्रयोग में लाकर कचरे में फेंक दिया जाता है। यह जीव जन्तुओं, वनस्पति और मनुष्य सभी के जीवन हेतु अत्यंत हानिकारक है। इसीलिए भारत सरकार द्वारा भी लगातार इसको प्रतिबंधित किया जाता रहा है। 

सिंगल यूज प्लास्टिक क्या है- 

सिंगल यूज प्लास्टिक को हम आम भाषा में डिस्पोजेबल प्लास्टिक कहते हैं। जिस प्लास्टिक उत्पाद को हम एक बार इस्तेमाल करने के बाद दोबारा किसी उपयोग में नहीं ले सकते हैं 

वे सभी उत्पाद सिंगल यूज प्लास्टिक कहलाते हैं। इस तरह के उत्पादों का मुख्य रूप से आधार पेट्रोलियम होता है। यह बहुत कम लागत में बनते हैं, 

इसलिए आज यह सबसे ज्यादा उपयोग किया जाने वाला उत्पाद बन गया है। हालांकि इसे खरीदने एवं यूज करने में ज्यादा खर्च नहीं होता हैं लेकिन फेंकने के बाद इसका कचरा, उसकी सफाई और उसे नष्ट करने के लिए बहुत अधिक पैसे खर्च हो जाते हैं और इस प्रक्रिया में पारिस्थितिकी को अत्यधिक नुकसान होता है। 

सिंगल यूज प्लास्टिक के उदाहरण-  

सिंगल यूज प्लास्टिक में प्लास्टिक की थैलियां, पॉलीथिन, स्ट्रॉ, प्लास्टिक के गिलास, प्लास्टिक के सोडा व पानी की बोतलें, प्लास्टिक के कप, प्लेट, डिस्पोजेबल प्रोडक्ट्स और खाद्य पैकेजिंग आइटम आदि शामिल हैं। ये सभी केवल एक बार उपयोग किए जाते हैं और फिर रिसायकल के लिए कचरे के रूप में फेंक दिए जाते हैं। 

सिंगल यूज प्लास्टिक के हानिकारक प्रभाव- 

• सिंगल यूज प्लास्टिक बायोडिग्रेडेबल नहीं होते हैं और आमतौर पर एक जमीन के अंदर चले जाते हैं जहां यह दब जाता है या यह पानी में चला जाता है और कुछ दिनों के बाद यह नदी-नालों के माध्यम से समुद्र में चला जाता है। प्लास्टिक मिट्टी और जल निकायों में प्रवेश करके छोटे कणों में टूट जाते हैं, लेकिन वे विघटित नहीं होते हैं।

• सिंगल यूज प्लास्टिक सौ से अधिक वर्षों तक मिट्टी और पानी में रहते हैं और विषाक्त रसायनों को छोड़ते हैं और इस तरह हमारे सुंदर ग्रह और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। 

• सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग मनुष्य, जानवरों और समुद्री जीवों के लिए बहुत हानिकारक है। 

• जल निकायों में या समुद्री जलीय जंतु अपने भोजन के साथ प्लास्टिक के कणों का सेवन करते हैं। प्लास्टिक को पचाया नहीं जा सकता है और इस तरह उनकी आंत में फंस जाता है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं। 

• बहुत बार पशु कचरे में से खाने की सामग्री के साथ प्लास्टिक की थैलियों को भी खा लेते हैं जिससे उनकी मृत्यु तक हो जाती है। 

• प्लास्टिक की थैलियां जो जल निकायों में प्रवेश करती हैं, जल प्रदूषण का एक प्रमुख कारण हैं और भूजल के गुणवत्ता स्तर को भी बुरी तरह प्रभावित करती हैं। प्लास्टिक की थैलियों का उत्पादन विषाक्त पदार्थों को छोड़ता है जो इसके उत्पादन में शामिल लोगों में गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। 

• सिंगल यूज प्लास्टिक को जलाकर नष्ट करने पर यह पर्यावरण प्रदूषण का प्रमुख कारण बनता है। प्रदूषित वातावरण मानव में विभिन्न रोगों का एक प्रमुख कारण है। सिंगल यूज प्लास्टिक का विलोपन- किसी भी चीज को खुद से अलग करने या निकाल देने की क्रिया या भाव विलोपन कहलाता है।

 सिंगल यूज प्लास्टिक का विलोपन -  

किसी भी चीज को खुद से अलग करने या निकाल देने की क्रिया या भाव विलोपन कहलाता है। सिंगल यूज प्लास्टिक का विलोपन मानव जीवन के साथ साथ समस्त प्राणिजगत के हित के लिए अत्यंत आवश्यक है।

यद्यपि भारत सरकार प्लास्टिक के प्रयोग व बिक्री पर लगातार प्रतिबंध लगाती आ रही है परन्तु जब तक हम खुद इसका प्रयोग करना बंद नहीं करेंगे तब तक इसका विलोपन करना किस प्रकार सम्भव होगा। प्लास्टिक के हानिकारक प्रभावों को देखते हुए हमें तत्काल इसको अपने जीवन से निकाल फेंकना चाहिए। हम प्लास्टिक की थैलियों में सामान लाने के बजाए कपडे के थैले का प्रयोग कर सकते हैं। डिस्पोजल बर्तनों के लिए कागज के बने बर्तन या पत्तल का प्रयोग पर्यावरण को नुकसान से बचाएगा| 

उपसंहार- 

हमारी प्रकृति हमारा पर्यावरण हमारे जीवन का आधार है, हमारा पालनहार है। यदि हम इसके लिए कुछ बेहतर नहीं कर सकते तो कम से कम हमें इसको बर्बाद तो नहीं करना चाहिए। अपने पर्यावरण और इसमें रहने वाले जीव जंतुओं की रक्षा हेतु हमें सिंगल यूज प्लास्टिक का पूर्णतया विलोपन कर देना चाहिए ताकि हम और हमारे पर्यावरणीय मित्र एक खुशहाल पर्यावरण में सांस ले सकें। हमारी सरकार ने भी 2022 तक भारत को  

प्लास्टिक से मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। हम सभी को मिलकर सरकार की इस पहल में अपनी भागीदारी देनी चाहिए। 

"सिंगल यूज प्लास्टिक का अगर हो जाए विलोपन, स्वच्छता और खुशहाली में फले फूले जनजीवन।" 


एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक प्रदूषण को कम करना युवाओं की भूमिका निबंध


"धरली की अब यही पुकार 
प्लास्तिक मुम्त करों हर हाल 
बद रहा प्रदूषण हर साल 
जन-जीतन हो रहा वेहाला" 

परती एकमात्र ऐसा मह जिस पर जीतन संभव है यहाँ खाने हेतु फल ,पीने हेतु पानी, सासँ लेने हेतु वायु अर्यात वह सभी तत्व उपलब्ध है जो मनुष्य के लिए आवश्यक है। वर्तमान समय मे हमारे द्वारा इस धरती को धन्यवाद करने के बजाय हम निरंतर इसका दोहन कर रहे हैं। कई पदूषण से हमने समुन्न, पहाड, मैदान आदि को प्तर्षित किया है। ऐसे ही एक मुख्य कारण काफी तेजी से नुकसान पहुंचा रहा है जोकि वर्तमान समय मे एक विकराल रुप धारण कर चुका है। 

प्लास्टिक का उपयोग मनुष्य, आनवरो और समुद्री जीवों के लिए बहुत हानिकारक है प्लास्तिक की पैलियो का उत्पादन जोकि एकल उपयोग प्लास्तिक है विवस्तपदायों को होता है जो इसके उत्पादन मे शामिल लोगों मे ठानीर विमारी का कारण बनता है अतः सर्गप्पणम हमे यह जानने की आवश्यकता है कि सिंगल राज, प्लास्टिक क्या है ? इसे हम सामान्य भाषा मे कहे तो ऐसा प्लास्टिक जिसका उपयोग हम केवल एक ही बार करते है जिसे डिस्पोजेबल प्लास्तिक जी कहते है इसमे हमारे दोनिक जीवन से जुड़े प्लास्तिक की यौलिया, पॉलीथिन, प्लास्टिक के गिलास पानी की छोतले आदि शामिल है। 

आज हम तिहास के पृष्ठो को पलटकर देखे  तो 1950 मे दुनिया-भर मे प्लास्तिक उत्पादन 1.5 मिलियन टन प्पा 2015 तक आते आते यह 322 मिलियन टन हो गया है।जहाँ देवों वही स्ग विरों प्लास्टिक का कचरानजर आता है। हर साल पूरी दुनिया मै  500 अरस प्लास्टिक वेगो का इस्तेमाल किया जाता है। 

अतः अगर देते तो भारत द्वारा अमी तक प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने हेतु कई सम्भव प्लधासू किए आते हैं। जैसे हाल ही में प्लास्तिक समाकी शेकषाम के लिए भारत के सकंल्प जिसे Beat Plastic Pollution  के नाम से जाना है जिसका उद्देश्य 2022 तक एकल प्लयोग वाले प्लास्तिकका पूर्ण उन्मूलन कर देना है 

किन्तु जरा सोचिए स्या इस उन्मूलन से ही देश मा विश्व प्लास्टिक मुस्त हो सकता है तो नही वर्तमान समय मे आवश्यकता हो सकता हैतो नही वर्तमान समय मे आवश्यकता है कि हर युवा पिरव का हर व्यन्ति यह सम्ल्प ले कि वह प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करेगा तथा पर्यावरण को एक बहुमूल्य उपहार पेगा स्मोकि कहा भी जाता है कि आज का युठा कल का अविष्य है। इसी तथ्य को ध्यान रखकर हम आने वाली पीढी को हरियाली नामक धरोहर दे सकते हैं। यह स्वप्न तभी समंद होगा अब हर एक व्याप्त

घरती माँ का प्लास्तिक नामक राक्षस से सरकाको क्योकि अगर मै बदलूगा तो मेरा परिवार बदले मेरा परितार बदलेगा तो मेरा मुहल्ला बदलेगा, उसके बाद मेरा नगर,राज्य, राष्ट्र त सम्पूर्ण पस इस रापस से मुक्ति पा सकता है और विश्व मि से शुम्न खा, स्वच्छ पर्यावरण , शुद्ध पानी इत्यादि पुष्यरुपी चादर ओट सकता है। 





 THANK YOU SO MUCH 




 





 




Comments

Popular posts from this blog

Principles of Reduce Reuse Recycle in Plastic Waste Management Essay in hindi

Principles of Reduce Reuse Recycle in Plastic Waste Management Essay in Hindi प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन में पुन: उपयोग को कम करने के सिद्धांत हिंदी में निबंध  "प्लास्टिक के इस्तेमाल ना करने के प्रति जागरूकता फैलाएं,  देश को प्लास्टिक अपशिष्ट से मुक्त करवाए" प्रस्तावना: दोस्तों, आज प्लास्टिक अपशिष्ट का बढ़ता अंबार मानवीय सभ्यता के लिए सबसे बड़े संकट के रूप में उभर रहा है। आज प्लास्टिक हमारे रोजमर्रा के जीवन का एक ऐसा हिस्सा बन गया है जिसे हम अपने से अलग नहीं कर सकते। आज हमारे फल, सब्जियों, बच्चों के दूध पीने की बोतलें, पानी की बोतलें और भी बहुत सारी चीजें पूरी तरह से प्लास्टिक पर निर्भर है। लेकिन जो प्लास्टिक हमने अपनी सुविधा के । लिए अविष्कार किया था आज वो हमारे पर्यावरण के लिए नासूर बन गया है। समुद्र हो या नदियां, पहाड हो या कोई खाली मैदान हर जगह प्लास्टिक का  अपशिष्ट देखने को मिल रहा है। दोस्तों, प्लास्टिक को नष्ट होने में हजारों साल लग जाते हैं और यह समुद्र, नदियों में पड़ा रहकर हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता रहता है। तो प्लास्टिक के पर्यावरण पर होने वाले नुकसान को देखत

Independent India @75 self reliance with integrity essay

  Independent India @75 self reliance with integrity essay On 15 August 1947, our country India got freedom from the slavery of the British. This year we are celebrating 75th Independence Day of India. After attaining independence, India started taking small steps on the path of development in every field. In the last few years, India has taken steps towards making India a self-reliant India with the aim of ending its dependence on foreign countries in every field. Now every day India is taking small but strong steps towards becoming self-reliant. Being self-reliant is the dream of every individual, society and nation. Our former Prime Minister Mrs. Indira Gandhi has said that "the strength of a nation is ultimately what it can do on its own, not what it can borrow from others". After attaining independence, the dream of self-reliance started flourishing in the heart of India. As we know that our Prime Minister has already launched "Atmanirbhar Bharat", but in this

Essay On Innovative Ideas for Zero Plastic Waste hindi

Essay On Innovative Ideas for Zero Plastic Waste in Hindi शून्य प्लास्टिक कचरे के लिए अभिनव विचारों पर निबंध हिंदी में "धरती और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में अपनी जिम्मेदारी निभाए,  आओ भविष्य को प्लास्टिक अपशिष्ट मुक्त बनाए " प्रस्तावना  दोस्तों, आज भारत में प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या गंभीर रूप लेती जा रही है। आज प्लास्टिक प्रदूषण पर नियंत्रण मानव जाति की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है। आज हर इन्सान अपने जीवन में किसी ना किसी रूप में प्लास्टिक का उपयोग कर रहा है। मगर यही प्लास्टिक हमारी धरती और पर्यावरण के लिए नासूर बन गया है।  तो लगातार बढते प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए जल्द से जल्द सख्त कदम उठाने की जरूरत है। दोस्तों, अगर प्लास्टिक को खत्म करना है तो सबसे जरूरी है प्लास्टिक अपशिष्ट के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना।  कहते हैं कि बच्चे देश का भविष्य है अगर वो सही पथ पर चलेंगे तो देश हमेशा विकास की ओर बढेगा। तो ऐसे में प्लास्टिक प्रदूषण को कम करना है तो सबसे जरूरी है कि बच्चों को प्लास्टिक प्रदूषण के नुकसान से अवगत कराना। साथ ही अगर बच्चे प्लास्टिक अपशिष्ट के प्रति जागरूक हो